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गुरुवार, ३० ऑगस्ट, २०१२

कुछ तो...


इस जहाँ में अभी कितनीही बातें
हुईही नही हैं..
और हम हैं के कहते हैं,
हमने सबकुछ सिख लिया हैं...
अभी तो न जाने
कितनी बातोंसे अंजान हैं हम
और हम कहते हैं
हमने सारा जहाँ देख लिया हैं...
अभी तो कयामत
देखीभी नही हैं हमने,
मगर, हम कहते हैं,
हमने तैरना सिख लिया हैं... .
जिस पल हम ये मानेंगे,
हम सिर्फ़ एक कतरा हैं इस जहाँका,
तब हम कह सकेंगे,
हमने कुछ तो जान लिया हैं...
________________________-मनस्वी
१२:३९ - ३० अगस्त २०१२

गुरुवार, ३ मे, २०१२


मन की गहराइयाँ हो समुंदर से ज़्यादा,
कल्पनाओंकी उँचाई आसमाँसे उँची||
धड़कनें हवाओंसे आगे जाती हुई,
अरमानोंसे थरक रही हैं भूमि||
ऐसी हो अगर किसी की दीवानगी,
तो मंज़िलोको पाना मुश्किल नहीं होता||
मंज़िले तो खुद सामने आ जाती हैं,
चल कर मंज़िलोंतक जाना ज़रूरी नहीं होता||

मंगळवार, २४ एप्रिल, २०१२

मुद्दतसे इंतज़ार किया हैं उनके आने का...
वो आए हैं और हम खामोश हैं|

सोचा था वो आएँगे तो कितनीही बातें करेंगे,
आज वो सामने हैं और हम खामोश हैं|

 लगता था वो आतेही उनको बाहों में समा लेंगे,
आज वो इंतज़ार में हैं और हम खामोश हैं|

मंगळवार, ३ एप्रिल, २०१२

निगाहे इश्क़से भरी हैं, जबसे देखा हैं उनको,
अब तो दुनिया में बस उन्हीका दीदार होता हैं|
दिल में यूँ बस चुके है वो तब से,
अब साँस भी लेते हैं तो उनका नाम निकल आता हैं|
कोई दीवाना कहता हैं, कोई पागल समझता हैं|
इश्क़ का ये फसाना, यूँही चलता रहता हैं|

सोमवार, १९ डिसेंबर, २०११

वो आहट....

इक वक़्त था, आशीए लगता था,
उनकी हर साँस हमसे जुड़ी हैं|
आज न जाने क्यूँ लगता हैं,
हर बात टूट चुकी हैं|

कभी हम उनसे, वो हमसे
मिलने को बेताब रहते थें|
आज न जाने क्यूँ लगता हैं,
वो बेताबी गुमसी हो गयी हैं|

उनके आने की आहटसेही हम,
पूरी दुनिया की खुशियाँ पाते थें|
आज दुनिया तो वही हैं, लेकिन...
वो आहट कहीं खो सी गयी हैं|

शुक्रवार, १६ डिसेंबर, २०११

वो मिलने आते हैं हमसे,
हम उनमेंही खो जातें हैं|
वो पूछतें रहते हैं हमारा हाल,
पर हम खो को ढूंड नही पाते|
इंतेज़ार इतना करातें हैं वो,
के दो जमाने बीत जाते हैं|
थोड़ीसी शिकायत क्या करते हैं हम,
तो वो गुस्सा हो जातें हैं|
वो गुस्सा होते हैं पलमें,
पलमें फिर प्यार करते हैं|
उनकी इसी अदापे तो हम,
बार बार मरतें हैं|
तेरे इश्क़ में दीवाने हुए इतना,
की मरभी जाएँगे तो खुदा वापस भेज देगा वापस,
कहेगा.. जा, बक्ष दी ज़िंदगी तेरे इश्क़ को देखकर...
इतनी आसानीसे कह दिया उसने, "मर जाओ",
के अब साँस लेना भी मुश्किल हो गया हैं|
अब तो याद भी नही कब आखरी साँस ली थी हमने,
शायद एक जमाना हो गया हैं|

रविवार, १७ जुलै, २०११

ख्वाब तो कई देख रखें हैं हमनें|
लब्ज तो कई लिख रखे हैं हमनें|
बस इंतज़ार हैं उन लम्हो का,
जब हम जी सकेंगे उन ख्वाबोंको|
इंतज़ार हैं उन्ही लोगों का,
जिनसे, कह सकेंगे इन्ही लब्जोंको|
ना जाने वो लम्हा वो लोग कब आएँगे|
हमारे दिल का ये बोझ हल्का करने,
के हम देख सके नये ख्वाबों को,
और लिख सके नये लब्जोंको|

विनायक बेलोसे
ज़िंदगी तो चलती रहेगी, हमें चलाने की ज़रूरत हैं|
ज़िंदगी के साथ आगे बढ़ने की ज़रूरत हैं|

कुछ भी हो कहीं थमे न ये ज़िंदगी,
ये ख़याल हमेशा ज़िंदा रखने की ज़रूरत हैं|

हर पल छाँव नसीब नहीं होगी,
कभी धूप में भी चलने की ज़रूरत हैं|

रास्ते और मंज़िले तो आते जाते रहेंगे,
बस हमें ज़िंदगी जीने की ज़रूरत हैं|

गुरुवार, ३० जून, २०११

वो देखते हैं दुनिया हमारी आँखोंसे'
और हम दुनिया में उन्हिको देखते हैं|
वो शरमाके पलके झुका लेते हैं,
और हम उनकी आँखोंमें देखने को तरसते हैं|

मंगळवार, २१ जून, २०११

तेरे इश्क़ में सनम, हम इतने दीवाने हुए,
हर लब्ज की गझल बनी, हर धून के गाने हुए|

तेरी हर अदा के सनम, हम इतने कायल हुए,
तूने सिर्फ़ आह भरी और हम पूरे घायल हुए|

तेरी चाह में न जाने कितने ही बर्बाद हुए,
और हम हैं बस तेरे दीदारसे ही आबाद हुए|

तेरी याद

कभी तेरी जुल्फे कभी नैन,
उड़ा रहे हैं मेरा चैन|
सच कहूँ तो सनम तेरे बिना,
मैं बिता न पाऊं रैन|

हर पल हर लम्हा,
अब याद तेरी आती हैं|
कुछ भी मैं कर ना पाऊं,
ऐसे मुझको तड़पा जाती हैं|

तेरी याद मुझे ना आए
मैं कोशिश यहीं करता हूँ|
फिर याद मुझे आता हैं
मैं तुझ बिन जी ना पाऊँ|

बुधवार, १५ जून, २०११

इस 'काश'नेही तो हमे
अब तक रोक रखा था|
कोई आएगा जरूर
इस उम्मिद को जगाए रखा था|
न जाने कब उनसे मुलाकात होगी
शायद ये मिलना
अगले जनममें लिखा था|
फरियाद न जाने ये
कौन कर गया था
खुदा भी हमे यहाँ
फिर छोड गया था...
तब से हम बैठे हैं
इस उम्मिद में...
के आयेगा वो
जो हमे याद कर गया था|
राज तो खुले थें
सारे दिल के हमारे...
मगर देर हो भी चुकी थी...
वो आए तो थे
हमसे मिलने मगर..
तब तक हमारी
कबर खुद चुकी थी...
बेवफा तो हो गये
खुद से मगर...
उनसे तो हमेशा
वफ़ा ही तो की थी....
ना जाने हमने ऐसी
क्या खता की थी..
के बदले में हमे
बेवफाइ मिली थी...