मुकाम पे पहुँचना तो बस सफ़र का एक हिस्सा था। मैं खुद को पाकर आया हूँ, यहीं तो करने निकला था।।
- #मनस्वी #VinayakVBelose
ना तूने जिक्र किया, ना मैंने बात की.. नजर से नजर मिली, और बात बन गयी।
#मनस्वी
नसीब ले के तो आते हैं कई लोग, पर हम आदतों से मजबूर हैं। एक आदत ऐसी भी हैं की, अपना नसीब हम खुद लिखते हैं।।
कभी तू किसीका अपना था, आज फिर पराया हैं। तेरे इश्कने जिताया था तुझे, तेरे गुरुर ने हराया हैं।
तुझे इश्क था मुझसे पर क्या करु, अपने बंजारेपनसे मैंने भी उतनीही मोहब्बत की हैं|
इस जहाँ में अब बचा ही कौन हैं तेरा, चल फकीरा, कोई और जहाँ ढूंढते हैं।